Bhartha Mahasayulaku Wignapthi Review: तेलुगु सिनेमा में रवि तेजा का नाम कभी एनर्जी, टाइमिंग और लगातार हिट फिल्मों का दूसरा नाम हुआ करता था। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के, उन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट से इंडस्ट्री में खास जगह बनाई। लेकिन पिछले कुछ सालों में उनके चुनाव और फिल्मों की क्वालिटी पर सवाल उठने लगे हैं।
ऐसे में जब Bhartha Mahasayulaku Wignapthi को संक्रांति रिलीज़ के तौर पर कॉमेडी एंटरटेनर बताया गया, तो उम्मीदें अपने आप बढ़ गईं। सवाल यही था क्या यह फिल्म रवि तेजा का असली कमबैक साबित होगी?
सीधा जवाब: नहीं।
कहानी पुरानी बोतल, वही पुरानी शराब
फिल्म की कहानी बेहद जानी-पहचानी है। राम सत्यनारायण (Ravi Teja) स्पेन में एक वाइन बिज़नेस से जुड़ा व्यक्ति है। वहीं उसकी मुलाकात मनसा (Ashika Ranganath) से होती है और एक रिश्ता बन जाता है। राम इसे विदेश तक सीमित एक हल्का सा चैप्टर समझता है। लेकिन भारत लौटकर वह अपनी पत्नी बालामणि (Dimple Hayathi) के साथ नॉर्मल जिंदगी जीने लगता है।
Bhartha Mahasayulaku Wignapthi ट्विस्ट तब आता है जब मनसा अचानक हैदराबाद बिज़नेस डील के लिए पहुंच जाती है। इसके बाद शुरू होता है झूठ, बहाने और डर का सिलसिला, जिससे कॉमेडी निकालने की कोशिश की जाती है।
कहानी इतनी पतली है कि पूरी फिल्म उसी एक लाइन पर टिकी रहती है। न कोई मजबूत सब-प्लॉट, न कोई ठोस टकराव, न ही कोई असली ड्रामा।
निर्देशन और लेखन जहां फिल्म सबसे ज्यादा फेल होती है
डायरेक्टर किशोर तिरुमाला शुरुआत में थोड़ा उम्मीद जगाते हैं। स्पेन वाला हिस्सा तेज़ है, और कुछ सीन्स में हल्की ताजगी भी दिखती है। लेकिन इंडिया लौटते ही फिल्म स्किट्स के ढेर में बदल जाती है।
Bhartha Mahasayulaku Wignapthi कॉमेडी ज़्यादातर डायलॉग-बेस्ड है, जो सोशल मीडिया मीम्स और पुराने फॉर्मूलों पर टिकी लगती है। कई जोक्स ज़बरदस्ती ठूंसे हुए महसूस होते हैं। साउंड इफेक्ट्स और ओवरएक्टेड पंचेज़ हंसी पैदा करने की बजाय माहौल को कमजोर करते हैं।
सनिल और वेन्नेला किशोर जैसे कलाकार कुछ जगहों पर संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर लेखन उनके हाथ बांध देता है।
सबसे बड़ी समस्या फिल्म का मैसेज
फिल्म का सबसे परेशान करने वाला पहलू इसका थीम है। क्लाइमैक्स में रवि तेजा का किरदार अपने अफेयर को जस्टिफाई करता है और जिम्मेदारी लेने की बजाय महिलाओं पर दोष डालता है। इसे न तो आत्मचिंतन दिखाया गया है, न ही सुधार।
कॉमेडी के नाम पर इस तरह की सोच को “नॉर्मल” बनाकर दिखाना फिल्म को बेहद कमजोर और गैर-जिम्मेदार बनाता है। यही वह मोड़ है जहां Bhartha Mahasayulaku Wignapthi पूरी तरह पटरी से उतर जाती है।
अभिनय रवि तेजा की झलक, लेकिन सहारा नहीं
Bhartha Mahasayulaku Wignapthi Review रवि तेजा अब भी कुछ सीन में अपनी पुरानी चमक दिखाते हैं। उनका डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज कई जगह फिल्म को गिरने से बचाती है। डिम्पल हयाती पत्नी के रोल में फिट बैठती हैं, और अशिका रंगनाथ ईमानदारी से अपना किरदार निभाती हैं। लेकिन सिर्फ परफॉर्मेंस किसी कमजोर स्क्रिप्ट को नहीं बचा सकती।
टेक्निकल पक्ष औसत से ज्यादा कुछ नहीं
सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक है। एडिटिंग और टाइट हो सकती थी। कई सीन बेवजह खिंचे हुए हैं। म्यूज़िक कहानी के साथ चलता है, लेकिन गानों की प्लेसमेंट फिल्म की रफ्तार तोड़ती है।
थोड़ा बेहतर, लेकिन काफी नहीं
Bhartha Mahasayulaku Wignapthi रवि तेजा का कमबैक नहीं है। हां, यह उनकी कुछ हालिया कमजोर फिल्मों से थोड़ी बेहतर जरूर है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी तारीफ है।

फिल्म स्किट-कॉमेडी, पुराने जोक्स और एक बेहद कमजोर मैसेज पर टिकी है। अगर आप सिर्फ टाइम पास और हल्की-फुल्की कॉमेडी चाहते हैं, तो शायद कुछ सीन आपको मुस्कुरा दें। लेकिन एक मजबूत संक्रांति एंटरटेनर और एक यादगार रवि तेजा फिल्म के तौर पर यह साफ तौर पर एक मिस्ड ऑपर्च्युनिटी है।
Disclaimer: यह रिव्यू सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और फिल्म देखने के अनुभव पर आधारित है। लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, कलाकार या फिल्म से जुड़ी भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।
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