ई स्पोर्ट्सयोजनामनोरंजनबिजनेस

Premanand Ji Maharaj: घर और मंदिर की पूजा में क्या है अंतर जानिए प्रेमानंद महाराज का स्पष्ट जवाब

On: January 10, 2026 7:44 PM
Follow Us:
Premanand Ji Maharaj

Premanand Ji Maharaj: नमस्कार दोस्तों, वृंदावन धाम स्थित प्रेमानंद जी महाराज अपने सरल शब्दों और गहरे आध्यात्मिक ज्ञान के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। हाल ही में उनके आश्रम में आए एक भक्त ने उनसे एक बेहद अहम सवाल पूछा क्या घर पर की गई पूजा और मंदिर में की गई पूजा में कोई अंतर होता है?

हिंदू धर्म में मंदिर, तीर्थ और धामों को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में यह प्रश्न हर साधक के मन में कभी न कभी जरूर आता है। इस सवाल का उत्तर देते हुए प्रेमानंद जी महाराज ने बड़े ही सहज अंदाज़ में घर और मंदिर की पूजा के बीच का अंतर समझाया।

घर और मंदिर की पूजा में क्या अंतर है?

Premanand Ji Maharaj के अनुसार, घर और मंदिर में की गई पूजा में वास्तव में बहुत बड़ा अंतर होता है। उन्होंने इसे उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति घर पर 1000 माला का जाप करता है, गौशाला में 100 माला करता है और किसी सिद्ध देवालय में केवल 1 माला का जाप करता है, तो देवालय में की गई 1 माला घर की 1000 मालाओं के बराबर फल देने वाली होती है।

Premanand Ji Maharaj
Premanand Ji Maharaj

महाराज आगे बताते हैं कि यदि वही जाप वृंदावन जैसे पवित्र धाम में किया जाए, तो उसका फल और भी अधिक बढ़ जाता है। वृंदावन में की गई एक माला, सामान्य स्थान पर किए गए हजारों जाप के समान मानी जाती है। उनका कहना है कि स्थान की पवित्रता साधना के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।

स्थान बदलने से क्यों बढ़ जाता है साधना का फल?

Premanand Ji Maharaj समझाते हैं कि जब कोई व्यक्ति घर में बैठकर नाम-जाप करता है और वही जाप गंगा तट पर जाकर करता है, तो दोनों के फल में अंतर होता है। यदि वही साधना गंगा नदी के भीतर खड़े होकर की जाए, तो उसका प्रभाव और भी अधिक हो जाता है।

Premanand Ji Maharaj उनके अनुसार, मंदिर, तीर्थ, धाम, गौशाला और पवित्र नदियों के तट ऐसे स्थान हैं जहां पहले से ही असंख्य संतों और साधकों की तपस्या का प्रभाव मौजूद होता है। यही कारण है कि वहां किया गया जप, ध्यान और पूजन अधिक फलदायी माना गया है।

शास्त्र क्या कहते हैं पूजा की पद्धति के बारे में?

प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि शास्त्रों में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख मिलता है Premanand Ji Maharaj कि पवित्र धामों, सिद्ध मंदिरों, नदियों के किनारे और गौशालाओं में किया गया नाम-जाप, घर की तुलना में अधिक प्रभावशाली होता है।

Premanand Ji Maharaj
Premanand Ji Maharaj

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि घर की पूजा व्यर्थ नहीं होती। Premanand Ji Maharaj घर पर की गई भक्ति भी पुण्य देती है, लेकिन यदि संभव हो तो व्यक्ति को समय निकालकर मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर अवश्य जाना चाहिए, ताकि साधना का फल कई गुना बढ़ सके।

Premanand Ji Maharaj का संदेश साफ है भक्ति भाव सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थान की पवित्रता साधना की शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है। घर पर पूजा करना उत्तम है, परंतु समय-समय पर मंदिर, तीर्थ और धामों में जाकर किया गया पूजन आत्मिक उन्नति को और तेज़ कर देता है। यदि जीवन में भक्ति को और गहराई देना चाहते हैं, तो पवित्र स्थानों से जुड़ना एक अत्यंत प्रभावशाली मार्ग है।

Disclaimer: यह लेख प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचनों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आध्यात्मिक विचारों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य धार्मिक जानकारी साझा करना है। किसी भी आध्यात्मिक निर्णय से पहले अपने विवेक और गुरु की सलाह अवश्य लें।

Also Read

Aaj Ka Love Rashifal: 2026 का पहला दिन इन 4 राशियों के लिए रोमांटिक, 5 राशिवालों को मिल सकता है नया प्यार

Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का भविष्यफल और दिन का संकेत

Sakat Chauth 2026: चंद्रोदय समय, शुभ मुहूर्त और गणेश जी की आरती, जानिए व्रत का पूरा महत्व

Anuj Prajapati

मैं A1 News24 डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का संस्थापक हूँ। A1 News24 पर हम आपको खेल, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, योजनाएँ, एंटरटेनमेंट और अन्य ट्रेंडिंग खबरों की सबसे ताज़ा जानकारी प्रदान करते हैं। मैंने A1 News24 को भरोसेमंद समाचार स्रोत और जानकारी का मंच बनाने के लिए तैयार किया है, ताकि विभिन्न दर्शक हमेशा सटीक और अपडेटेड जानकारी पा सकें।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now