1 January 2026: की सुबह के साथ ही निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सोना इस साल भी वही कमाल दोहराएगा जो उसने 2025 में दिखाया था? Gold Price Prediction बीते साल सोने ने ऐसा प्रदर्शन किया कि शेयर बाजार और क्रिप्टो जैसी एसेट्स भी पीछे छूट गईं। करीब 75% का रिटर्न देकर गोल्ड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अनिश्चित दौर में वही सबसे भरोसेमंद विकल्प है।
अब नया साल शुरू हो चुका है और हर निवेशक जानना चाहता है कि Gold Price Prediction 2026 क्या कहती है। क्या भाव ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचेगा या फिर यहां से रफ्तार थोड़ी थमेगी?
2025 में Gold Rally के पीछे की असली वजह
Gold Price Prediction साल 2025 की शुरुआत में इंटरनेशनल मार्केट में सोना करीब 2,638 डॉलर प्रति औंस था, जो दिसंबर के आखिर तक 4,550 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया। भारत में भी तस्वीर बेहद मजबूत रही। MCX पर सोना जहां 2024 के अंत में करीब ₹78,950 था, वहीं 2025 खत्म होते-होते ₹1.38 लाख के पार निकल गया।

इस उछाल के पीछे सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैली अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ता सरकारी कर्ज बड़ी वजह रहे। जब बाकी एसेट्स डगमगा रही थीं, तब गोल्ड ने निवेशकों को स्थिरता दी।
Gold Price Prediction 2026: ₹1.50 लाख हकीकत या उम्मीद
1 January 2026 को खड़े होकर देखें तो एक्सपर्ट्स की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है, लेकिन दिशा साफ तौर पर पॉजिटिव है। कई ग्लोबल एनालिस्ट मानते हैं कि 2026 में सोना किसी “वन-वे रैली” में नहीं जाएगा, बल्कि एक मजबूत दायरे में ट्रेड करेगा। इंटरनेशनल स्तर पर गोल्ड के 3,900 से 5,000 डॉलर प्रति औंस के बीच रहने का अनुमान है।
Gold Price Prediction अगर रुपये की स्थिति और इंपोर्ट कॉस्ट को ध्यान में रखा जाए, तो भारत में सोने का भाव ₹1.30 लाख से ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम तक जाना पूरी तरह संभव माना जा रहा है, हालांकि यह सफर उतार-चढ़ाव से भरा हो सकता है।
वो 5 बड़े फैक्टर्स जो 2026 में तय करेंगे Gold की चाल
1. Interest Rate Trend
अगर ग्लोबल सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में नरमी बरकरार रखते हैं, तो सोने की मांग मजबूत बनी रहेगी। कम ब्याज दरें गोल्ड को और आकर्षक बनाती हैं।
2. Currency पर भरोसे की परीक्षा
भले ही महंगाई काबू में हो, लेकिन अगर डॉलर या अन्य करेंसी पर भरोसा कमजोर पड़ता है, तो निवेशक फिर सोने की शरण लेते हैं।
3. Global Debt Pressure
दुनिया भर में बढ़ता सरकारी कर्ज फिएट करेंसी पर दबाव बनाता है। ऐसे माहौल में सोना सबसे सुरक्षित विकल्प बनकर उभरता है।
4. Geopolitical Uncertainty
युद्ध, ट्रेड वॉर या क्षेत्रीय तनाव इनमें से कोई भी फैक्टर गोल्ड को तुरंत सपोर्ट देता है। 2026 में यह रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
5. Supply और Demand का संतुलन
नई गोल्ड माइंस की रफ्तार धीमी है, जबकि भारत और चीन जैसे देशों में मांग लगातार बनी हुई है। यही वजह है कि कीमतों को मजबूत आधार मिलता है।
Central Banks और Gold: 2026 की सबसे बड़ी कहानी
2026 में सोने की दिशा तय करने में सेंट्रल बैंकों की खरीदारी सबसे अहम रोल निभाएगी। पिछले कुछ सालों में उन्होंने रिकॉर्ड मात्रा में गोल्ड अपने रिजर्व में जोड़ा है। अब सोना सिर्फ रिजर्व नहीं, बल्कि एक रणनीतिक एसेट बन चुका है। जब तक यह खरीदारी जारी रहती है, तब तक गोल्ड में बड़ी गिरावट की संभावना कम ही दिखती है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब निकलता है?

नए साल की शुरुआत यानी 1 January 2026 पर इतना साफ है कि सोना शॉर्ट टर्म में भले उतार-चढ़ाव दिखाए, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसकी चमक अभी बाकी है। ₹1.50 लाख का आंकड़ा आसान नहीं, लेकिन मौजूदा हालात में इसे नकारा भी नहीं जा सकता।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी और सामान्य विश्लेषण के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दिए गए Gold Price Prediction किसी निवेश सलाह का विकल्प नहीं हैं। सोने या किसी भी वित्तीय एसेट में निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें। बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है।
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